यमन के तइज़ शहर की एक गली में 2016 में सऊदी समर्थक एक स्नाइपर ने उनके पिता अब्दुलक़वी अल-आयज़री को गोली मारकर हताहत कर दिया था।
उसके बाद से ही बच्चे काफ़ी डरे सहमे से रहते थे और वे खेलने के लिए भी घर से बाहर नहीं निकलते थे।
लेकिन हालिया दिनों में यमन के इस शहर में हिंसा में उस समय काफ़ी वृद्धि हो गई, जब सऊदी समर्थन प्राप्त दो सशस्त्र गुटों इसलाही और सलफ़ी के बीच लड़ाई में तेज़ी आ गई।
25 अप्रैल को हाशिम जब अपने घर के सामने खड़ा हुआ था, उसी समय कुछ ही मीटर की दूरी से एक स्नाइपर की गोली उसे आकर लगी।
4 वर्षीय बच्चे की मां यह देखकर तुरंत बेहोश हो गई और अगले दिन तक उसे होश नहीं आया, जबकि उसके भाई-बहन गहरे सदमे में हैं और उनमें से एक निरंतर रो रहा है।
फ़ायरिंग और भीषण लड़ाई के बावजूद, कुछ पड़ोसियों ने अपनी जान को जोखिम में डाला और हाशिम को अल-रवदा प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उस वक़्त तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्चा पहले ही अपनी जान से हाथ धो बैठा था।
इसलाही और सलफ़ी गुटों के बीच समझौता होने से एक दिन पहले हाशिम की मौत हो चुकी थी।
हाशिम के एक पड़ोसी वलीद अब्दुल हामिद का कहना है कि लड़ाई से शहर के सभी नागरिकों की जान ख़तरे में है और हम अपना घर बार छोड़कर भी कहीं जा नहीं सकते।
उनका कहना था कि हाशिम एक यतीम बच्चा था, उसे नहीं पता था कि घर से क़दम निकालना इतना ख़तरनाक हो सकता है और स्नाइपर लड़ाकों और बच्चों के बीच कोई अंतर नहीं करते हैं।
ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने मार्च 2015 में अमरीका और इस्राईल की सहायता से अपने पड़ोसी देश पर व्यापक बमबारी शुरू कर दी थी, जो आज भी जारी है।
सऊदी द्वारा थोपे गए युद्ध और नाकाबंदी के कारण 125000 से अधिक बच्चों की भूख और कुपोषण के कारण मौत हो चुकी है और लाखों अन्य मौत की कगार पर हैं।
इसके अलावा, यमन का आधारभूत ढांचा पूर्ण रूप से नष्ट हो चुका है और 20 हज़ार से अधिक लोग सीधे बमबारी के कारण मारे गए हैं।